Alert! 50,000 रुपये से ज्यादा किराया देने पर ध्यान दें! TDS नियमों की अनदेखी से लग सकता है भारी जुर्माना

अगर आप किसी प्रॉपर्टी के लिए 50,000 रुपये या उससे अधिक मासिक किराया देते हैं, तो आपको इनकम टैक्स के नए नियमों का पालन करना अनिवार्य है। इनकम टैक्स विभाग ने हाल ही में उन किरायेदारों को नोटिस भेजा है, जिन्होंने TDS (Tax Deducted at Source) नहीं काटा और जमा नहीं किया। अक्टूबर 2024 से, 50,000 रुपये या अधिक किराया देने वालों के लिए 2% TDS कटौती अनिवार्य कर दी गई है। पहले यह दर 5% थी, लेकिन इसे घटाकर 2% कर दिया गया है।

TDS न काटने पर क्या होगा?

यदि किरायेदार ने TDS नहीं काटा, तो उसे डिफॉल्टर माना जाएगा और उस पर 1% से 1.5% प्रति माह की दर से जुर्माना लगाया जा सकता है। इस पर ब्याज भी जुड़ सकता है, जिससे किरायेदार की वित्तीय जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन टैक्सपेयर्स ने HRA (House Rent Allowance) का दावा किया है, लेकिन किराये पर TDS नहीं काटा, उन पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

किन मामलों में मिल सकती है छूट?

अगर मकान मालिक ने अपने इनकम टैक्स रिटर्न में किराए की राशि को घोषित किया है और उस पर टैक्स चुका दिया है, तो किरायेदार को राहत मिल सकती है। लेकिन इसके लिए मकान मालिक को आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। अगर मकान मालिक अपनी वित्तीय जानकारी साझा नहीं करना चाहता, तो किरायेदार को खुद ही TDS काटकर जमा करना होगा, ताकि किसी भी कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।

क्या करना चाहिए?

  • यदि आपका मासिक किराया 50,000 रुपये या उससे अधिक है, तो किराए पर 2% TDS काटना अनिवार्य है।
  • यह TDS काटकर इनकम टैक्स विभाग में जमा करें और शेष राशि मकान मालिक को दें।
  • अगर आपने पहले ऐसा नहीं किया, तो अपडेटेड रिटर्न दाखिल करने का विकल्प मौजूद है।
  • समय पर TDS न काटने पर आपको जुर्माना और ब्याज देना पड़ सकता है।

निष्कर्ष

सरकार के नए नियमों के तहत किरायेदारों को सतर्क रहने की जरूरत है। अगर आप 50,000 रुपये या उससे अधिक किराया देते हैं, तो TDS कटौती सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी तरह की कानूनी जटिलताओं और जुर्माने से बचा जा सके। यदि मकान मालिक पहले ही टैक्स चुका चुका है, तो किरायेदार को दस्तावेजों की जांच करके राहत मिल सकती है।