Naga Sadhu: नागा साधु बनने के लिए कामेंद्रियों को भंग करना क्यों है जरूरी? जानें कैसे किया जाता है ये संस्कार
- bySagar
- 12 Dec, 2024
PC: newsnationtv
नागा साधुओं के बारे में आपने सुना होगा। उनका जीवन बेहद ही साधारण होता है और वे सांसरिक सुखों और मोह-माया से दूर रहते हैं। कामेंद्रियों का त्याग उन्हें सांसारिक इच्छाओं से मुक्त करता है, जो मोक्ष प्राप्ति के मार्ग में सबसे बड़ी रुकावट माना जाता है।
हिंदू धर्म में, काम और भोग से मुक्त होकर ही कोई भी व्यक्ति अपने अंदर की ऊर्जा को साधना, ध्यान और तप में लगा सकता है। यह ऊर्जा आध्यात्मिक उत्थान में सहायक होती है। यही नागा साधुओं पर भी लागू होता है।
नागा साधु बनने के लिए कामेंद्रियों को भंग करना जरूरी है। इसके पीछे कई कारण और मान्यताएं हैं, जिनके बारे में आप हिंदू धर्म के शास्त्रों और अखाड़ों की परंपराओं के माध्यम से जान सकते हैं।
कैसे किया जाता है कामेंद्रियों को भंग
नागा साधुओं के विशिष्ट संस्कारों में कामेंद्रियों का भंग करना भी शामिल है। साधु को अखाड़े के ध्वज के नीचे 24 घंटे बिना खाए पिए खड़े रहना पड़ता है। उनके कंधे पर एक दंड और हाथ में मिट्टी का बर्तन होता है। वही अखाड़े के पहलवान उनकी निगरानी भी करते हैं। इसके बाद वैदिक मंत्रों के साथ अखाड़े का एक साधु उनके लिंग को झटके देकर निष्क्रिय करता है। कामेंद्रियों को भंग करने की प्रक्रिया भी ध्वज के नीचे संपन्न होती है। इसके बाद वे नागा साधू बनते हैं।
नागा साधुओं को ब्रह्मचर्य का पालन भी करना पड़ता है जो आत्मा की शुद्धि के लिए जरूरी है और ईश्वर से एकात्मता प्राप्त करने के लिए आवश्यक है। नागा साधु बनने के लिए कामेंद्रियों का त्याग उनकी साधना, धर्म और जीवन के उद्देश्य का एक अनिवार्य हिस्सा है।






