Offbeat: शिव का वो पुत्र जिसने मां पार्वती पर डाली बुरी नजर, इस ग्रंथ में दी गई है जानकारी

pc:indianews

वामन पुराण में शिव के राक्षस पुत्र अंधक के बारे में भी जानकारी दी गई है। कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव काशी में ध्यान में बैठे थे, तभी पीछे से देवी पार्वती आईं और अपने हाथों से उनकी आँखों को ढक लिया। देवी के ऐसा करते ही पूरी धरती, ब्रह्मांड में अंधकार छा गया। तब संसार को बचाने के लिए भगवान शिव ने तीसरी आंख खोली जिस से पूरे संसार में फिर से रौशनी हो गई।

देवी पार्वती के पसीने से हुई अंधक की उत्पत्ति
ऐसा करने से भगवान शिव ने दुनिया को अंधकार से बचा लिया लेकिन उनकी तीसरी आंख की रोशनी से उत्पन्न गर्मी से माता पार्वती को पसीना आ गया। पसीने की इन बूंदों से एक बालक का जन्म हुआ जो दिखने में राक्षस जैसा था। जब देवी ने भोलेनाथ से उस बालक के बारे में पूछा तो भगवान शिव ने पार्वती को बताया कि वह उनका पुत्र है। उस बालक का जन्म अंधकार के कारण हुआ था, इसलिए उसका नाम अंधक रखा गया।

राक्षस पुत्र
मान्यता के अनुसार हिरण्यकश्यप ने पुत्र पाने के लिए शिव की आराधना की, जिससे प्रसन्न होकर महादेव ने अपने पुत्र ‘अंधक’ को उपहार में दिया। अंधक का पालन-पोषण राक्षसों के बीच हुआ इसी कारण उसमे राक्षसों के गुण आ गए। अंधक बहुत बलवान और शक्तिशाली था, फिर भी वह और भी शक्तिशाली बनाना चाहता था। इसके लिए उसने ब्रह्मा जी की तपस्या की और उनसे यह वरदान प्राप्त किया कि उसकी मृत्यु तभी होगी, जब वह अपनी माता पर बुरी नज़र डालेगा।

भगवान शिव को करना पड़ा वध
अंधक ज अपने जैविक माता-पिता को पूरी तरह भूल चुका था, वह बहुत बलवान था और वह तीनों लोकों का राजा बन कर उभरा। इस ब्रह्मांड की सबसे सुंदर स्त्री से विवाह करना चाहता था, जब उसको ये पता चला कि माता पार्वती ब्रह्मांड की सबसे खूबसूरत स्त्री है तो वह उनके पास विवाह का प्रस्ताव लेकर गया। इस से देवी पार्वती क्रोधित हो गईं और उसके प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। वह उन्हें जबरन अपने साथ ले जाने लगे तो मां पार्वती चिल्लाई और उनकी आवाज सुनकर भोलेनाथ वहां आए और अंधक का वध कर दिया। कई कथाओं में अंधक को ऋषि कश्यप और माता दिति का पुत्र भी बताया गया है, जिसका पालन-पोषण स्वयं महादेव ने किया था।

Disclaimer: इस आलेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है।पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। इंडिया न्यूज इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है।