Petrol Price Update- होर्मुज का रास्ता खुलने की हुई घोषणा, क्रूड ऑयल के भाव गिरे धड़ाम से

दोस्तो ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे हुए युध्द की वजह से होर्मुज रास्ता बंद था, जिसकी वजह से पूरी दुनिया में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ गए थे, लेकिन ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को फिर से खोलने की घोषणा के बाद, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई है। यह घटनाक्रम भू-राजनीतिक तनाव में कमी के बीच आया है, जिसमें अमेरिका, ईरान, इज़राइल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम समझौते शामिल हैं, इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के फिर से खुलने का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ना शुरू हो गया है।

कीमतों में गिरावट के पीछे के मुख्य घटनाक्रम

ईरान ने आधिकारिक तौर पर अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक यातायात के लिए स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को फिर से खोल दिया है।

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम समझौते से भू-राजनीतिक अनिश्चितता कम हुई है।

इज़राइल और लेबनान के बीच भी संघर्ष विराम समझौता हुआ है।

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने X (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से इसे फिर से खोलने की पुष्टि की।

तेल की कीमतों में भारी गिरावट

WTI क्रूड $10.84 गिरकर $83.85 प्रति बैरल पर पहुँच गया।

ब्रेंट क्रूड $9 गिरकर लगभग $90 प्रति बैरल पर आ गया।

प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी 7% से अधिक की गिरावट आई।

यह कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का लगातार चौथा दिन है, जिसका मुख्य कारण आपूर्ति में सुधार की उम्मीदें हैं।

स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ क्यों महत्वपूर्ण है?

यह वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा संभालता है।

यह दुनिया भर में तेल और गैस के निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है।

बढ़ते तनाव के कारण ईरान ने 28 फरवरी को इसे बंद कर दिया था।

इसके बंद होने से पहले कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर $122 प्रति बैरल तक पहुँच गई थीं और वैश्विक मुद्रास्फीति बढ़ गई थी।

इसके फिर से खुलने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के स्थिर होने की उम्मीद है, जिससे ऊर्जा आयात करने वाले देशों को राहत मिलेगी।

भारत पर प्रभाव

भारत के कच्चे तेल के आयात का लगभग 40% हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।

LPG आयात का लगभग 85% हिस्सा इसी पर निर्भर है।

आपूर्ति के सामान्य होने से देश में ऊर्जा संबंधी चिंताओं के कम होने की उम्मीद है।

बाजार का दृष्टिकोण

तेल और गैस की आपूर्ति कुछ ही दिनों में सामान्य हो जाएगी।

कीमतें धीरे-धीरे और नरम पड़ सकती हैं।

यदि भू-राजनीतिक तनाव नियंत्रण में रहता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर हो सकते हैं।

क्या भारत में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें गिरेंगी?

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद, खुदरा ईंधन की कीमतों में कमी की संभावना कम ही लगती है:

सरकार ने पहले उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए उत्पाद शुल्क (excise duty) में कटौती की थी।

जब कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार चली गई थीं, तब तेल कंपनियों ने नुकसान खुद उठाया था। जैसे-जैसे सप्लाई स्थिर होगी, सरकार कीमतों में और कटौती करने के बजाय ड्यूटी में दी गई राहत वापस ले सकती है।