15 साल में किसने दिए ज्यादा रिटर्न – गोल्ड ETF या फिजिकल गोल्ड? जानिए पूरी तुलना

वैश्विक बाजारों में एक बार फिर अस्थिरता के बीच निवेशक पारंपरिक सुरक्षित विकल्प—सोना—की ओर लौट रहे हैं। भारत में सोना न केवल समृद्धि और परंपरा का प्रतीक है, बल्कि लंबे समय से निवेश का लोकप्रिय माध्यम भी रहा है।

लेकिन आज के समय में जब सोने में निवेश करने की बात आती है, तो एक अहम सवाल खड़ा होता है: क्या पारंपरिक फिजिकल गोल्ड खरीदना बेहतर है या फिर आधुनिक गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में निवेश करना? आइए आंकड़ों के आधार पर दोनों विकल्पों की तुलना करें और जानें कि किसने पिछले 10 से 15 वर्षों में बेहतर रिटर्न दिए हैं।


फिजिकल गोल्ड: परंपरा से जुड़ा भरोसेमंद निवेश

फिजिकल गोल्ड यानी आभूषण, सोने के सिक्के और बिस्किट—जो भारतीय परंपरा में गहराई से जुड़े हैं। त्योहारों, शादियों और विशेष अवसरों पर इसकी खरीदी शुभ मानी जाती है। हालांकि इसमें कुछ चुनौतियाँ भी हैं जैसे:

  • चोरी का खतरा
  • सुरक्षित भंडारण की जरूरत
  • आभूषणों पर मेकिंग चार्ज

फिर भी, इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार:

  • पिछले 15 वर्षों में फिजिकल गोल्ड ने औसतन 9–10% का वार्षिक रिटर्न दिया है।
  • पिछले 10 वर्षों में कुछ वर्षों में यह रिटर्न 12% प्रति वर्ष तक पहुंच गया, जो एफडी जैसे पारंपरिक निवेशों से बेहतर है।

अगर आप एक सुरक्षित और स्पर्श योग्य संपत्ति चाहते हैं, जो सांस्कृतिक रूप से भी मूल्यवान हो, तो फिजिकल गोल्ड एक अच्छा विकल्प है।


गोल्ड ETF: आधुनिक, पारदर्शी और टैक्स-फ्रेंडली

2007 में भारत में शुरू हुए गोल्ड ETF एक ऐसा विकल्प है जिससे आप बिना भौतिक रूप से सोना खरीदे निवेश कर सकते हैं। ये स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होते हैं और इनका मूल्य बाजार में सोने की कीमत पर आधारित होता है।

Moneycontrol जैसे वित्तीय प्लेटफॉर्म के अनुसार:

  • पिछले 10–15 वर्षों में निप्पॉन इंडिया गोल्ड ETF और SBI गोल्ड ETF ने औसतन 8.5% से 9.5% तक वार्षिक रिटर्न दिए हैं।
  • टैक्स लाभ और भंडारण की लागत न होने के कारण, लंबी अवधि में कई बार ETF का रिटर्न फिजिकल गोल्ड के बराबर या उससे बेहतर रहा है।
  • आप इनकी खरीद और बिक्री ऑनलाइन कभी भी कर सकते हैं, जो डिजिटल युग के निवेशकों के लिए फायदेमंद है।

गोल्ड बनाम गोल्ड ETF: एक नजर में तुलना

फीचरफिजिकल गोल्डगोल्ड ETF
रिटर्न (10–15 साल)9–12% वार्षिक8.5–9.5% वार्षिक
सुरक्षा और भंडारणभंडारण की जरूरत, चोरी का जोखिमसुरक्षित, कोई स्टोरेज नहीं
लिक्विडिटीबेचना आसान, पर शुद्धता पर निर्भरहाई लिक्विडिटी, शेयर बाजार में ट्रेड
टैक्स लाभवेल्थ टैक्स और मेकिंग चार्ज लागूLTCG नियमों के तहत अधिक टैक्स-फ्रेंडली
उपयोगितागहनों और उपहारों में उपयोगकेवल निवेश के लिए
पारदर्शितासीमितउच्च

आपके लिए कौनसा बेहतर है?

यह पूरी तरह इस पर निर्भर करता है कि आप निवेश से क्या चाहते हैं:

  • अगर आप पारदर्शिता, टैक्स लाभ और ऑनलाइन सुविधा चाहते हैं, तो गोल्ड ETF आपके लिए उपयुक्त है।
  • अगर आप गोल्ड को पारंपरिक तरीके से खरीदना पसंद करते हैं, खासकर शादी-ब्याह जैसे आयोजनों के लिए, तो फिजिकल गोल्ड बेहतर रहेगा।

निष्कर्ष

दोनों ही विकल्पों—फिजिकल गोल्ड और गोल्ड ETF—के अपने-अपने फायदे हैं। जहां फिजिकल गोल्ड सांस्कृतिक महत्व और भावनात्मक संतोष देता है, वहीं गोल्ड ETF आधुनिक निवेशकों के लिए सुविधा, पारदर्शिता और टैक्स लाभ प्रदान करता है।

चाहे आप परंपरावादी हों या तकनीक-प्रेमी निवेशक, एक बात तय है—सोना हर युग में निवेश का भरोसेमंद विकल्प बना हुआ है।