TDS TCS नियमों में बदलाव: 1 अप्रैल से होंगे बड़े बदलाव, जानें इससे क्या प्रभाव पड़ेगा

TDS TCS नियमों में बदलाव: केंद्रीय बजट 2025 में सरकार ने टैक्स से जुड़ी कई अहम घोषणाएं की हैं, जिनमें खासतौर पर TDS (टैक्स डिडक्शन एट सोर्स) और TCS (टैक्स कलेक्शन एट सोर्स) में बदलाव शामिल हैं। ये बदलाव 1 अप्रैल 2025 से लागू होंगे और इनका उद्देश्य आम टैक्सपेयर्स और व्यापारियों के लिए टैक्स नियमों को सरल बनाना है, ताकि पहले जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।

बड़े बदलाव:

  1. नई TDS लिमिट:
    जब आप बैंक से ब्याज कमाते हैं, किराया चुकाते हैं या कोई बड़ा भुगतान करते हैं, तो TDS एक निश्चित सीमा के बाद कटता है। इस बजट में यह प्रस्तावित किया गया है कि इन सीमाओं को रिवाइज किया जाएगा, जिससे बार-बार अनावश्यक टैक्स डिडक्शन से बचा जा सके और आपके कैश फ्लो में सुधार हो सके।
  2. विदेश पैसे भेजने पर राहत:
    अब 7 लाख की बजाय 10 लाख रुपये तक भेजने पर TCS नहीं लिया जाएगा। यदि आप बच्चों की शिक्षा, परिवार के खर्चे या किसी अन्य कारण से पैसे भेजते हैं, तो अब यह राहत मिलेगी। पहले 7 लाख रुपये से अधिक की रकम पर TCS लगती थी, लेकिन अब यह सीमा बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है।
    इसके अलावा, अगर पैसे शिक्षा ऋण के माध्यम से भेजे जा रहे हैं, तो उस पर कोई TCS नहीं लिया जाएगा। इससे विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और उनके माता-पिता को बड़ी राहत मिलेगी।
  3. 50 लाख रुपये से अधिक की बिक्री पर TCS खत्म:
    अगर आपका व्यापार बड़ा है और आपकी बिक्री 50 लाख रुपये से ज्यादा है, तो अब आपको उस पर 0.1% TCS कटौती करने की जरूरत नहीं होगी।
  4. जो लोग ITR नहीं भरते, उनसे ज्यादा TDS नहीं कटेगा:
    पहले अगर कोई व्यक्ति आयकर रिटर्न (ITR) नहीं भरता था, तो उससे अधिकतम TDS/TCS काट लिया जाता था। बजट 2025 में यह प्रावधान हटाने का प्रस्ताव है, जिससे अब आम टैक्सपेयर्स और छोटे व्यापारियों को अनावश्यक उच्च टैक्स दरों से राहत मिलेगी।
  5. TCS जमा करने में देरी पर जेल की सजा नहीं:
    पहले यदि कोई व्यक्ति TCS राशि समय पर सरकार को जमा नहीं करता था, तो उसे 3 महीने से लेकर 7 साल तक की सजा और जुर्माना भुगतना पड़ता था। लेकिन बजट 2025 में इस नियम में बदलाव किया गया है। अब यदि आउटस्टैंडिंग TCS समय पर जमा किया जाता है, तो उस पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।

ये बदलाव टैक्सपेयर्स के लिए सरल और सुविधाजनक होंगे, जिससे उन्हें टैक्स संबंधित परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा और उनकी वित्तीय स्थिति बेहतर होगी।