व्हाट्सऐप प्राइवेसी पर सवाल: क्या मेटा सच में चैट्स पढ़ रहा है?

दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप की प्राइवेसी को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भारत, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय समूह ने मेटा के खिलाफ अमेरिकी अदालत में मुकदमा दायर किया है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि व्हाट्सऐप का ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन’ दावा झूठा है और मेटा के पास यूजर्स के निजी मैसेज पढ़ने और स्टोर करने की क्षमता है।

याचिकाकर्ताओं के आरोप

  • Meta कथित रूप से प्राइवेट मैसेज तक पहुंच रखता है
  • संदेश कंपनी के सर्वर पर स्टोर किए जा सकते हैं
  • कर्मचारी इन मैसेजेस का विश्लेषण कर सकते हैं
  • अंदरूनी सूत्र (व्हिसलब्लोअर्स) ने कथित रूप से प्राइवेसी उल्लंघनों की जानकारी दी है

याचिकाकर्ता इसे क्लास-एक्शन सूट के रूप में प्रमाणित करने की मांग कर रहे हैं, यानी अगर आरोप साबित होते हैं तो मेटा को दुनिया भर के यूजर्स को भारी मुआवजा देना पड़ सकता है।

मेटा का जवाब

मेटा ने आरोपों को तुच्छ और बेतुका बताते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया। प्रवक्ता एंडी स्टोन के अनुसार, व्हाट्सऐप पिछले एक दशक से सिग्नल प्रोटोकॉल का उपयोग कर रहा है, जो सुरक्षा के मामले में गोल्ड स्टैंडर्ड माना जाता है।

कंपनी ने कहा कि यह मुकदमा केवल काल्पनिक है और वकीलों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाएगी।

एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन क्या है?

व्हाट्सऐप के अनुसार, मैसेज भेजते ही यह एक डिजिटल लॉक में बंद हो जाता है।

  • केवल भेजने वाले और पाने वाले के डिवाइस पर ही मैसेज डिकोड हो सकता है
  • न व्हाट्सऐप न ही मेटा के सर्वर इसे पढ़ सकते हैं

वर्तमान मुकदमे ने इस मूल तकनीक और दावे को चुनौती दी है, यह सवाल उठाते हुए कि क्या कंपनी सच में यूजर्स के मैसेज तक पहुंच रखती है या नहीं।

यूजर्स के लिए क्या महत्वपूर्ण है?

अगर आरोप सही पाए गए, तो इसका मतलब होगा:

  • यूजर ट्रस्ट और प्राइवेसी का उल्लंघन
  • संवेदनशील व्यक्तिगत बातचीत का दुरुपयोग
  • मेटा के लिए कानूनी और वित्तीय नतीजे

इस दौरान यूजर्स को सतर्क रहने और संवेदनशील चैट के लिए अतिरिक्त प्राइवेसी उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है।