सोने ने रचा इतिहास, पहली बार $5,000 प्रति औंस के पार पहुंचा भाव, वैश्विक अनिश्चितता बनी वजह

सोने की कीमतों ने नया इतिहास रच दिया है। पहली बार एक औंस गोल्ड का भाव $5,000 के स्तर को पार कर गया, जिससे वैश्विक बाजारों में हलचल तेज हो गई है। बीते दो वर्षों में सोने की कीमतें दोगुने से भी ज्यादा बढ़ चुकी हैं, जो इसे एक बार फिर सबसे भरोसेमंद सुरक्षित निवेश साबित करती हैं।

पिछले एक हफ्ते में सोने की कीमतों में 8% से ज्यादा की तेजी देखने को मिली और यह करीब $5,040 प्रति औंस के स्तर तक पहुंच गया। यह तेजी 1979 के बाद की सबसे मजबूत तेजी मानी जा रही है। साल 2026 की शुरुआत से अब तक सोना 15% से अधिक चढ़ चुका है।

चांदी भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर

सोने के साथ-साथ चांदी ने भी निवेशकों को चौंका दिया है। पिछले कारोबारी सत्र में चांदी ने $100 प्रति औंस का आंकड़ा पार कर लिया और फिलहाल यह $105 के आसपास कारोबार कर रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी की कम यूनिट कीमत इसे छोटे निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बनाती है, खासकर ऐसे समय में जब बाजारों में अस्थिरता बढ़ रही हो।

तेजी के पीछे क्या हैं बड़े कारण?

कीमती धातुओं में आई इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे कई वजहें हैं:

  • भू-राजनीतिक तनाव में इजाफा: अमेरिकी टैरिफ नीतियों और आक्रामक रुख से वैश्विक अनिश्चितता बढ़ी है
  • डॉलर की कमजोरी: डॉलर इंडेक्स में मई के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट
  • सरकारी बॉन्ड्स से निकासी: अमेरिकी ट्रेजरी और अन्य सॉवरेन बॉन्ड्स में बिकवाली
  • फेडरल रिजर्व को लेकर असमंजस: फेड प्रमुख की नियुक्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता

इन सभी कारणों से निवेशक करेंसी और बॉन्ड जैसे पारंपरिक साधनों से निकलकर गोल्ड और सिल्वर की ओर रुख कर रहे हैं।

वैश्विक बाजारों की स्थिति

एशियाई बाजारों में शुरुआती कारोबार के दौरान सिंगापुर में सोने की कीमतों में 1% की बढ़त दर्ज की गई, जबकि चांदी 2% से ज्यादा उछली। प्लैटिनम में हल्की गिरावट देखने को मिली, जबकि पैलेडियम के दाम बढ़ते रहे।

यह संकेत देता है कि निवेशकों का भरोसा व्यापक रूप से कीमती धातुओं की ओर शिफ्ट हो रहा है।

अमेरिका और एशिया में बढ़ती चिंता

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका की घरेलू नीतियों और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। वहीं, एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भी अस्थिरता देखने को मिली है। हाल ही में जापान के लॉन्ग और अल्ट्रा-लॉन्ग सरकारी बॉन्ड्स में भारी बिकवाली इसका उदाहरण है।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

इतिहास बताता है कि जब सोना इस तरह तेज़ी से चढ़ता है, तो यह बाजार में डर का संकेत होता है। हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोना अब भी पोर्टफोलियो को संतुलन देने वाला मजबूत विकल्प बना हुआ है।

$5,000 के पार सोने का पहुंचना सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितता का प्रतिबिंब है। चांदी की रिकॉर्ड तेजी के साथ, कीमती धातुएं एक बार फिर निवेशकों की पहली पसंद बनती नजर आ रही हैं। मौजूदा हालात में गोल्ड की चमक फिलहाल कम होती नहीं दिख रही।