Savings Account: क्या सिर्फ सेविंग्स अकाउंट में पैसा रखना सही है? CA ने मध्यमवर्ग को बताए बेहतर निवेश विकल्प

भारत में मध्यमवर्गीय परिवार अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने के लिए अक्सर सेविंग्स अकाउंट को सबसे भरोसेमंद विकल्प मानते हैं। आसान पहुंच और जोखिम न होने की वजह से यह पहली पसंद बन जाता है। लेकिन क्या लंबे समय के लिए यह रणनीति फायदेमंद है? एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) का मानना है कि सिर्फ सेविंग्स अकाउंट पर निर्भर रहना आर्थिक रूप से नुकसानदेह साबित हो सकता है।

सेविंग्स अकाउंट क्यों लगता है सुरक्षित?

सेविंग्स अकाउंट की सबसे बड़ी खासियत है तुरंत पैसे निकालने की सुविधा। मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की पढ़ाई या अचानक खर्च के समय यह बहुत काम आता है। इसके अलावा, बैंक 3 से 4 प्रतिशत तक ब्याज भी देते हैं।

हालांकि, समस्या तब शुरू होती है जब महंगाई को ध्यान में रखा जाए। अक्सर महंगाई की दर सेविंग्स अकाउंट पर मिलने वाले ब्याज से ज्यादा होती है। इसका मतलब यह है कि भले ही खाते में पैसा बढ़ रहा हो, उसकी असली कीमत समय के साथ घटती जाती है।

सिर्फ सुरक्षित रहना भी बन सकता है नुकसान

CA के अनुसार, मध्यमवर्गीय परिवार जोखिम से बचने के लिए निवेश से दूरी बनाते हैं। लेकिन पूरी बचत को कम ब्याज वाले खाते में रखना लंबे समय में आर्थिक प्रगति को रोक देता है। पैसा सुरक्षित तो रहता है, लेकिन बढ़ता नहीं है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सही निवेश का मतलब जोखिम लेना नहीं, बल्कि जोखिम को समझदारी से संभालना है।

बेहतर रिटर्न के लिए सही विकल्प

CA ने सलाह दी है कि बचत को अलग-अलग वित्तीय साधनों में बांटना चाहिए, जैसे:

  • फिक्स्ड डिपॉजिट (FD): सुरक्षित निवेश और सेविंग्स अकाउंट से ज्यादा ब्याज।
  • रिकरिंग डिपॉजिट (RD): नियमित रूप से बचत करने वालों के लिए उपयोगी।
  • म्यूचुअल फंड और SIP: लंबे समय में महंगाई से बेहतर रिटर्न देने वाले विकल्प।
  • पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF): टैक्स बचत के साथ सुरक्षित और स्थिर निवेश।
  • इंश्योरेंस और इमरजेंसी फंड: अचानक आने वाली परेशानियों से सुरक्षा के लिए जरूरी।

सेविंग्स अकाउंट में कितना पैसा रखें?

CA का सुझाव है कि रोजमर्रा के खर्च और आपात स्थिति के लिए 3 से 6 महीने का खर्च सेविंग्स अकाउंट में रखें। इससे जरूरत पड़ने पर तुरंत पैसे मिल सकेंगे और बाकी रकम बेहतर निवेश में लगाई जा सकेगी।

फाइनेंशियल प्लानिंग क्यों जरूरी है?

हर व्यक्ति की आय, खर्च और जिम्मेदारियां अलग होती हैं। इसलिए वित्तीय योजना भी व्यक्तिगत होनी चाहिए। सही प्लानिंग से न केवल बचत सुरक्षित रहती है, बल्कि भविष्य के लक्ष्यों को भी आसानी से पूरा किया जा सकता है।

निष्कर्ष

सेविंग्स अकाउंट जरूरी है, लेकिन पूरी बचत वहीं रखना समझदारी नहीं है। मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सही रणनीति यही है कि सुरक्षा और बेहतर रिटर्न के बीच संतुलन बनाया जाए। सही निवेश विकल्पों के साथ आज की बचत, कल की मजबूत आर्थिक नींव बन सकती है।