भारत में कर व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। 1 अप्रैल 2026 से केंद्र सरकार नया इनकम टैक्स एक्ट लागू करेगी, जो 64 साल पुराने Income Tax Act, 1961 की जगह लेगा। यह कदम टैक्स सिस्टम को आधुनिक, सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य टैक्स कानून को जटिलताओं से मुक्त करना और करदाताओं के लिए प्रक्रिया को आसान बनाना है। वर्षों में कई संशोधनों के कारण पुराना कानून काफी जटिल हो गया था। अब इसकी जगह एक नया, सुव्यवस्थित और स्पष्ट ढांचा तैयार किया गया है।
आइए जानते हैं नए इनकम टैक्स एक्ट में होने वाले चार प्रमुख बदलाव।
1. आसान और स्पष्ट भाषा
पुराने कानून की सबसे बड़ी समस्या उसकी जटिल भाषा और कई उपधाराएं थीं। नए कानून में:
- सरल और स्पष्ट शब्दावली
- कम क्रॉस-रेफरेंस
- व्यवस्थित अध्याय
- अस्पष्ट प्रावधानों में कमी
इससे आम करदाताओं के लिए नियमों को समझना आसान होगा।
2. पारदर्शिता में बढ़ोतरी
नया कानून टैक्स कैलकुलेशन और अनुपालन को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर देता है। करदाता आसानी से समझ सकेंगे:
- टैक्स कैसे तय होता है
- कौन-सी कटौतियां लागू होती हैं
- किन दस्तावेजों की जरूरत है
- नोटिस और आकलन की प्रक्रिया क्या है
डिजिटल सिस्टम को और मजबूत बनाया जाएगा, जिससे विवाद और मुकदमों में कमी आने की संभावना है।
3. आधुनिक अर्थव्यवस्था के अनुरूप बदलाव
1961 के बाद से भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। डिजिटल ट्रांजैक्शन, स्टार्टअप्स और ग्लोबल इनकम जैसे नए पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नया कानून तैयार किया गया है।
इसमें:
- डिजिटल लेनदेन से जुड़े प्रावधान
- अंतरराष्ट्रीय आय से संबंधित स्पष्ट नियम
- पुराने और अप्रासंगिक प्रावधानों को हटाना
जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।
4. कानूनी विवादों में कमी
नया ढांचा टैक्स विवादों को कम करने पर केंद्रित है। इसके तहत:
- दोहराव वाले प्रावधान हटाए जाएंगे
- नियमों को समेकित किया जाएगा
- स्पष्ट समयसीमा तय होगी
- विवाद निपटान प्रणाली को मजबूत किया जाएगा
इससे व्यवसायों और व्यक्तिगत करदाताओं को राहत मिल सकती है।
करदाताओं को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि करदाताओं को आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखनी चाहिए। जब तक विस्तृत नियम जारी नहीं हो जाते, तब तक मौजूदा कानून के तहत अनुपालन जारी रहेगा।
1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाला नया इनकम टैक्स एक्ट भारत की कर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सरल और भविष्य के अनुरूप बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।





